नई दिल्ली 06 / 10 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट
इससे पहले दिल्ली सचिवालय में भाजपा विधायकों को एलजी हाउस तक लाने के लिए मंत्री सौरभ भारद्वाज आप विधायकों के साथ नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता के पैरों में भी गिर गए।
वहीं, सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़कर मुख्यमंत्री आतिशी नेता प्रतिपक्ष की कार में बैठ गईं। इसके बाद भी जब मामला सुलझता नहीं दिखा तो एलजी हाउस से लौटते समय मंत्री सहित आप के विधायक बस मार्शलों के साथ धरने पर बैठ गए।
मुख्यमंत्री आतिशी ने बताया कि भाजपा का विधायक दल सुबह 10ः30 बजे दिल्ली सचिवालय पहुंचा। उन्हें बताया गया कि सेवा विभाग का मामला उपराज्यपाल के अधीन है, लेकिन भाजपा विधायक बरगलाने की कोशिश कर रहे थे।
भाजपा के विधायक दल की पोल खुल गई, क्योंकि आप सरकार और कैबिनेट ने स्पष्ट कर दिया कि जो निर्णय हमें लेने हैं, वे हम लेंगे।
लेकिन जिस पर एलजी का निर्णय चाहिए वह भाजपा करवाए। भाजपा एलजी से कुछ भी करवाने को तैयार नहीं है और बस मार्शल के मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। बैठक में पास हुआ कैबिनेट नोट
दिल्ली सरकार ने कैबिनेट बैठक कर बस मार्शलों और सिविल डिफेंस वालेंटियर्स की नौकरी को नियमित करने का प्रस्ताव पारित किया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि हमने भाजपा विधायकों व बस मार्शलों के सामने ही कैबिनेट की बैठक बुलाई और सभी बस मार्शलों की बहाली व पक्की नियुक्ति का प्रस्ताव पास किया।
अब इसे उपराज्यपाल को अनुमति देनी है। भाजपा बेनकाब हो गई है, क्योंकि भाजपा के विधायक एलजी के पास जाने को तैयार नहीं थे। कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज के पैर पकड़ने के बाद और बड़ी जद्दोजहद के बाद गए भी तो कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए। महिला को सुरक्षित बनाते हैं मार्शल : आतिशी
आतिशी ने कहा कि बसों में मार्शल होने से महिलाएं सुरक्षित महसूस करती थीं। उन्हें लगता था कि अगर उनके साथ कोई गलत व्यवहार करेगा, तो बचाने के लिए बस मार्शल मौजूद है। मंत्रियों और विधायकों पर गर्व : केजरीवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि मुझे अपने मंत्रियों और विधायकों पर गर्व है, जो जनता के काम करवाने के लिए किसी के पैरों में भी लेट जाते हैं। मेरी एलजी और भाजपा वालों से विनती है कि इस मुद्दे पर और राजनीति न करें और तुरंत बस मार्शलों को नौकरी पर रखा जाए। मंत्रियों का आरोप, गेट पर रोका
दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने आरोप लगाया कि एलजी हाउस पहुंचने पर सभी मंत्रियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को गेट पर ही रोक दिया गया। एलजी हाउस में सिर्फ मुख्यमंत्री और भाजपा विधायकों को ही जाने की अनुमति मिली।
मुख्यमंत्री आतिशी ने एलजी से सिविल डिफेंस वालेंटियर्स की नौकरी तत्काल बहाल करने का निवेदन किया। इस दौरान भी भाजपा विधायकों ने उनकी नौकरी बहाली के लिए न तो कुछ कहा और न ही कुछ प्रयास किया। बस मार्शलों ने कहा- पूरी पारदर्शिता से हो काम
एलजी हाउस के बाहर धरने पर बैठे मार्शलों का कहना है कि केंद्र व दिल्ली सरकार हमारा काम पूरी पारदर्शिता के साथ करें। इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम भाजपा नेताओं से कहना चाहते हैं कि एलजी उनके नुमाइंदे हैं, वे उनसे कहें कि जल्द हमें फाइल पर हस्ताक्षर करवाकर दें।
आप विधायकों पर विजेंद्र गुप्ता ने लगाया हाथापाई व अभद्रता का आरोप
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि शनिवार को भाजपा विधायकों के साथ मुख्यमंत्री आतिशी को मार्शलों के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने के बाद जब वे बाहर आए तो सचिवालय परिसर में आप विधायकों और असामाजिक तत्वों ने उनसे अभद्रता व हाथापाई की।
राजनिवास से बाहर निकलने पर मंत्री सौरभ भारद्वाज, विधायक कुलदीप कुमार, जरनैल सिंह और रोहित महरोलिया ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर हमला किया। इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस से करके एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डीटीसी के 10 हजार बस मार्शलों को पिछले साल 11 अक्तूबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर नौकरी से बिना कारण बताए हटा दिया गया।
नौकरी से हटाने से पहले 5-6 महीने तक वेतन ही नहीं मिला। मार्शलों को वेतन देने का अधिकार तत्कालीन वित्त मंत्री आतिशी के अधिकार क्षेत्र में था। उन्होंने जानबूझकर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया और फाइल उपराज्यपाल को भेज दी।
शनिवार को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में सरकार की तरफ से सहयोग नहीं मिला। बैठक में विपक्षी विधायकों के दबाव में सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय में औपचारिकता पूरी करने के लिए कैबिनेट नोट बना दिया गया।
इस नोट पर मंत्रियों के हस्ताक्षर तक नहीं थे और न ही भाजपा विधायकों की ओर से दिए ज्ञापन की किसी भी मांग को शामिल किया गया। भाजपा विधायक दल की मुख्यमंत्री से मांग
- सभी बस मार्शलों को तुरंत नियुक्त किया जाए।
- सेवाओं को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित किया जाए।
- कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सभी को स्थायी नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं।
- हर वर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई को वार्षिक वेतन वृद्धि भी लागू की जाए।
- मानदेय के बजाय वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।